सुबह निहारूँ, देखूँ शाम।चहुँ दिशाएँ, आठों याम।।
पत्ता-पत्ता, कली-कली,पुलकित हर्षित, घुली-मिली।तुमको देख रहा अविराम,चंदा सूरज प्रकृति तमाम।।
ओझल-बोझल नयन-पलक,उदीय से लेकर ऊषा तलक।नित्य निरंतर हर आयाम,स्वांस-स्वांस में तेरा नाम।।
सुबह निहारूँ, देखूँ शाम।चहुँ दिशाएँ, आठों याम।।