मुझे यूँ देखकर तेरा मुस्कुरा देना ही काफ़ी है,

तू न आये सही, तेरे ख़त का आ जाना ही काफ़ी है।

मुझे यूँ देखकर तेरा मुस्कुरा देना ही काफ़ी है ।।1।।


नहीं अपनी ये आदत, दूसरों को ज़ख्म दिखाने की,

तेरी यादों के मरहम इसपे लगा लेना ही काफ़ी है ।।2।।


करूँ ख़्वाहिश क्या दौलत की, बड़ी इज़्ज़त कमाने की,

तेरे दामन का खुशियों से भरा होना ही काफ़ी है ।।3।।


बड़ी मुद्दत से प्यासा बादलों ने रखा है हमको,

चैन के लिये ज़हर तेरा पिला देना ही काफ़ी है ।।4।।


दूर तेरी ज़िंदगी से क़ज़ा ले जाएगी जिस दिन,

तेरी आँखों के प्याले का छलक जाना ही काफ़ी है ।।5।।


#महेन्द्र सिंह राजपूत