मेरे घर की चमक से सब हैरान हुए होंगे,
बिटिया वाला घर है मेरा सब जान गए होंगे।
चूड़ी, बिंदिया, गुड्डे-गुड़िया, सजा घरौंदा,
उसकी ख़्वाहिश में ये सामान भरे होंगे।
घेरे, चूनर, गोटे, बूटे आदम क्या समझे,
बनकर पिता तनया का सब पहचान गए होंगे।
लगती माँ को परछाई, पिता को स्वप्न,
बेटी बिन जीवन आँगन सुनसान रहे होंगे।
#महेन्द्र सिंह राजपूत


