चाह नहीं मैं किसी शिकारी
के कंधे ढोया जाऊँ,
चाह नहीं किसी बेज़ुबान के
सीने में उतरा जाऊँ।
चाह नहीं किसी शाह, सेठ, नेता
के लिये मैं चल जाऊँ,
चाह नहीं किसी शौर्य दिखावे
हवा के संग ही मिट जाऊँ।
मुझे थाम लेना हे सैनिक
उस सीने देना तुम दाग,
जिस सीने में मातृभूमि के
लिये नहीं किञ्चित अनुराग।।
#महेन्द्र सिंह राजपूत


