भारत देश स्वतंत्र भयो तब..
अर्थ को संकट भयो बड़ भारो..
विपदा सकल सब पार करी शुरू..
अन्वेषण अंतरिक्ष को सारो..
साइकिल से कल पुर्जे ले जाकर..
थुंबा से रॉकेट चलो हमारो..
को नहीं जानत है इसरो..
अंतरिक्ष जगत में नाम तिहारो.. (१)
बिना रुके बढ़ते ही गए अब..
मील के पत्थर बने कई सारे..
आर्यभट्ट,रोहिणी,पी.एस.एल.वी..
इनसेट आदि कई उपग्रह उतारे..
नभ के रहस्य खुलते ही गए..
राकेश आकाश में पहुंच्यो हमारो..
को नहीं जानत है इसरो
अंतरिक्ष जगत में नाम तिहारो..(२)
सुनते थे चंदा को निंदिया की लोरी में..
मुट्ठी में चंदा हो,बीड़ा उठायो..
कौशल हमारा जाने जग सारा सो..
नभ में प्रथम चंद्र यान पठायो ..
जल कण उपस्थित है चंद्र धरा पर..
भेद बतायो ये दुनिया को सारो..
को नहीं जानत है इसरो..
अंतरिक्ष जगत में नाम तिहारो..(३)
चंदा के बाद जो मंगल की ठानी तो..
बस का नहीं तेरे कह कह चिढ़ायो..
गौ तेरी माता है हो सब गंवारू तुम..
भारत का रह रह उपहास उड़ायो..
पहले प्रयास में मंगल को पहुंचे जो..
मद बड़कन का दीन्ह उतारो..
को नहीं जानत है इसरो..
अंतरिक्ष जगत में नाम तिहारो..(४)
चंद्रयान दो,पहुंच्यों थो चंद्र पे..
प्रज्ञान औ विक्रम पर स्वर्ग सिधारो..
मोदीजी आय के ढांढस बंधायो तब..
कहयो विफलता से हिम्मत ना हारो..
फिर से जुटे विज्ञानी वीर सभी
जग को दिखाने पुरुषार्थ दुबारो
को नहीं जानत है इसरो
अंतरिक्ष जगत में नाम तिहारो..(५)
उड़ के गयो चंद्रयान तीन तब..
चंद्र के दक्षिण ध्रुव में पठायो ..
जो कारज करने में डरे सब..
वो अपने वीरों ने करके दिखायो ..
विस्मित विश्व हुयो नतमस्तक..
भारत को गूंज्यो जयजयकारो..
को नहीं जानत है इसरो..
अंतरिक्ष जगत में नाम तिहारो..(६)
बढ़ते कदम अब रुकने को ना है सो..
सूरज को अर्ध्य देने की तैयारी..
बुध,बृहस्पति,शुक्र,शनि सब..
आतुर हैं,कब आयेगी बारी..
व्योमनॉट्स अपने तैरेंगे नभ में जो..
छूटेगो गगन में यान हमारो.
को नहीं जानत है इसरो..
अंतरिक्ष जगत में नाम तिहारो..(७)
है विष्णु का,विराट रूप ये..
जामे ग्रह उपग्रह,सब हैं समाए..
विकसित भारत को शंखनाद ये..
कोउ बहिरो ही होगो जो ना सुन पाए..
शंकर सी संहार की शक्ति पर..
जग कल्याण है,ध्येय हमारो..
को नहीं जानत है इसरो..
अंतरिक्ष जगत में नाम तिहारो..(८)
- महेंद्र कुमार डागा
१० माधव चटर्जी स्ट्रीट
कलकत्ता- ७०० ०२०

