सज कर मेरे कानों पर
मेरा झुमका इतराता है कुछ ऐसे.....
बेशर्म वो बिन पूछे मेरे गालों को चूमे,
देखूं उसकी तरफ तो जा वो मेरे केशो से चिपके,
उलझे मेरे केशो से ऐसे ,
घिरकर मेरी चुनरी में अटके,
अटके वो कुछ ऐसे,
लिपटी हो प्रेमिका अपने प्रेमी से जैसे।
/महक शर्मा
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