यादें जो पिघलकर बह रही हैं इन आँखों से
दुनियां बहा सकती हैं
सिसकियॉ जो गले से निकल रही हैं
कानों के पर्दे फाड़ सकती हैं
दर्द का उठता समुद्री उफान कितने ही
किनारों को रौंद सकता है
सुइयों सा चुभता विरह भीष्म की
अन्तिम शय्या को भी चुनौती दे सकता है
धमनियों में बहता लहू भावनाओं की संकरी गलियों को छिछला कर सकता है
मौत एक प्यार की तमाम नफरतों को
जिन्दा कर सकती है
~मधुलिका
