स्त्री होना आसान नहीं है 

जीवन के हर मोड़ पर खरा

उतरना आसान नहीं है 

हर पल किसी और के लिए 

जीना आसान नहीं है 


पैदा हुयी तो "सोहर" नही 

गाया किसी ने 

माँ को बेचारगी के भाव

से देखा हर किसी ने 

बस एक जीव मान के

पाला हर किसी ने 

"जीवों पर दया करो"

ये कथन उसी वक्त

समझाया हो जैसे किसी ने



स्त्री होना आसान नहीं है 

कभी बेटी कभी बहन 

कभी पत्नी कभी माँ

सारे रिश्तों को एक साथ 

जीना आसान नहीं है 


बड़ी हुयी सबकी नसीहतों

के साथ "अकेले नहीं जाना"

"ढंग के कपड़े पहन"

कभी नहीं सुनी ग़र किसी की

तो कहा "ये लड़की तो हाथ से 

निकल गयी ब्याह करा दो इसका"

माँ बेचारी भी क्या करती

घर में कौन सी उसकी मरजी चलती


स्त्री होना आसान नहीं है 

एक घर को छोड़ दूसरे

घर को अपनाना आसान नहीं है 

अंजान चेहरो के बीच 

अपनी पहचान बनाना आसान नहीं है  


फिर मेरी बेटी आयी 

मेरे जीवन में एक नयी

उमंग सी छायी

ठाना मैने मन में 

कहानी अब ये बदलनी है 

बेटी को मेरी नयी जिंदगी जीनी है 


बेटी को बेटे जैसा पालना

आसान नहीं है 

"ये हुयी ना मर्दो वाली बात"

को "ये हुयी ना औरतों वाली बात"

में बदलना आसान नहीं है 

पर कोशिश इस माँ की जारी है 

एक नया अध्याय लिखने

की तैयारी है …..

सच में स्त्री होना आसान नहीं है… 


~मधुलिका / @Bawra_Mann_