रिश्तों की धूप छाँव
कभी खुशी तो कभी ग़म का भाव
हंसते है रोते है मगर साथ साथ ही
रहते हैं....
चलते है रूक जाते हैं फिर से चलने की
कोशिश में ना जाने कितनी बार गिरते हैं
हाथ एक दूजे का थामे फिर भी रखते हैं
निभाते है चाहे जितनी आये राह में मुश्किलें...
ये रिश्ते हैं जनाब कभी धूप की तरह
चिलचिलाते हैं
कभी छाँव बनकर सुकून दे जाते हैं
~मधुलिका


