बंद आँखों का वो मंज़रसराबोर होता है तेरे इश्क़ सेऐ खुदा !!बस इतनी सी इल्तिजा हैना खुले ये आँखें कभीबाद मरने के भी मंज़रवो साथ रह जाये
बंद आँखों का वो मंज़रसराबोर होता है तेरे इश्क़ से
ऐ खुदा !!
बस इतनी सी इल्तिजा हैना खुले ये आँखें कभी
बाद मरने के भी मंज़रवो साथ रह जाये