सुनो!!

जब भी होती हूँ उदास

तेरे नाम का श्रृंगार कर लेती हूँ 

तेरे नाम की एक काली बिंदिया 

तेरे नाम की वो पीली साड़ी

तेरे नाम की चंद लाल चूड़ियाँ पहन

खुद को ही निहारती हूँ ..

आइने में बसी तेरी 

आँखों की पुतलियों में..

कुछ अधूरा सा मगर हर बार रह जाता है 

मेरी सूनी मांग की तरह..


~मधुलिका / Bawra_Mann_