एक तस्वीर मेरी
उसने रखी
अपनी डायरी में
सबसे छुपा कर
रोज उस से बतियाता वो
अपने दिल का हर हाल बयां करता
कभी रो पड़ता उसके सामने
कभी अनायास ही मुस्कुराया करता
कभी गले से लगा लेता भींच के
कभी नाराज हो पन्नों में दबा देता
ऐसे ही हर पल वो मुझे जिया करता
वाकिफ ये किस्सा मुझे कल हुआ
एक आशना से उसकी
गुफ्तगू में जिक्र जब हुआ
न जाने मेरे दिल ने क्यूँ ये कहा
"काश…
मैं वो तस्वीर होती "
पलकों से जाने कुछ बूँद सा गिरा
गले में जैसे कुछ अटक सा गया
~मधुलिका /@Bawra_Mann_


