कर सकते हो ऐसा प्रेम जिसमें...
ना स्वार्थ हो
ना उम्मीद हो
ना करार हो
ना बंधन हो
ना शर्त हो
ना अविश्वास हो
ना संदेह हो
बस एक रिश्ता हो भावनाओं का भावनाओं
से...
एक दुसरे से जुड़े हो फिर भी एक दुसरे से मुक्त हो...
बोलो क्या कर सकते हो ऐसा प्रेम????
~मधुलिका


