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एक नयी "मधुलिका" ....

सुनो !!  

मेरे जिन गुणों से तुम्हें प्रेम था 

आज विसर्जित कर आयी मैं उनको 

संगम के उसी घाट पर 

लगाई थी डुबकी हमने जहाँ

माघी पूर्णिमा की भोर में..

याद है ना तुमको मनाया था वहाँ 

हमने प्रथम उत्सव अपने प्रेम का.. 

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