आवाजों के जंगल में...

कुछ खामोशियां रहती हैं... 

सिसकियाँ उनकी अक्सर रातों में 

सुनाई देती हैं...

मुस्कुरायें उनको अरसा हो गया...

बदहवास सी फिरती है इन जंगलों में

एक रोशनी के इंतज़ार में...


~मधुलिका