ऐ खुदा 

सुना है तू अच्छे बुरे

का फर्क बड़ी ईमानदारी

से करता है..


कहीं रोटियॉ 

तो कहीं भूख

परोसता है..


कहीं रूक्मणी का सुख

तो कहीं राधा का विरह

दे जाता है..


कहीं भरपूर जीवन

तो कहीं सजायाफ्ता 

मौत करार देता है..


क्या तुम्हारा न्याय भी

ढोंग अब करता है ???


कहीं गरीबी में जलाता है

तो कही विभूति बरसाता हैं 


एक ही थाली से सब तूझे

पूजते हैं 

फिर ऐसा भेद कैसे 

कर पाता है???  


सुना हैं अच्छे और बुरे का

फर्क बड़ी ईमानदारी 

से करता है !!!! 


~मधुलिका