ऐ जीवन के रंग मंच ,

कितने किरदार निभाए हैं ,

तू खुशी मना तू झूम के गा ,

तेरे हिस्से हम आए हैं ,


मानव क्षमता का रुख ये ,

दुख दर्द मोड़ क्या पाएंगे ,

जीत अटलता साहस प्रण ,

जिसकी बुद्धि में समाए हैं ,



~ मधुकर सिंह चौहान