टूटा है हर एक कहानी का किरदार कहीं ना कहीं।मग़र हौसला मेरी उम्मीद का क्यों टूटता ही नहीं।।फ़ैली हैं हर तरफ़ मनहूसियत और ख़ामोशी की चादर यहाँ।फ़िर भी होठों से नग़्मा मेरे वफ़ा का क्यों छूटता नहीं।।मधु गुप्ता "अपराजिता"