क्यों रोते हो क्यों दिल छोटा करते हो।
आखिर इस दुनिया से, आशा अपनेपन क्यों रखते हो।।
अक्सर ऐसा होता है जो सच्चा है वही तो आंखों में नमी रखता है।
ईश्वर भी हर पल उसकी रह- रह कर कड़ी परीक्षा लेता है।।
ना कर संताप कोई दुनिया की बेरहम चुभती बातों का।
है अग्नि परीक्षा जीवन ये, हर कदम तपना पड़ता है।।


