काँटों को भी ख़बर चल गई फूलों का मौसम आया है।

छूकर उसने हर कली को फूलों का गहना पहनाया है।।

ये देख आंखें नम हुई उसकी की छोड़कर फूल किसी और के दिल को भाया है

शायद यही बात है साच्ची जिसे चाहा उसने कहाँ पाया है।।

मधु गुप्ता "अपराजिता"