Poetry 1 min read 479.7K reads

गुनेहगार...


गलतियाँ सभी ने की मग़र कुसूरवार हम ही ठहराए गए।साथ चले थे जो साथी कस्ती से हमको उतारते दिखाए गए।।मधु गुप्ता "अपराजिता"

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