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ग़ुम है....


जो कभी अकेलेपन से डरते थे,वो अकेले के अंधेरों में आज ग़ुम है।यह कैसा वक़्त का सितम है,जो हालात के आगे बेबस है।।मधु गुप्ता "अपराजिता"

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