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चाँद- तारों....


कभी तुम हम को बुलाओं कभी हम तुमको बुलाए।चाँद तारों आओ बैठो एक दूसरे को दर्द-ए-पिन्हाॅं सुनाए।।मधु गुप्ता "अपराजिता"

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