Poetry 1 min read 407K reads

अकेला है....


ज़िंदगी को हमने अंदर-बाहर से बहुत टटोला हैं।बाहर से भीड़ में दिखने वाला अंदर से बहुत अकेला हैं।।मधु गुप्ता"अपराजिता "

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