एक आम सा रस्ता कुछ जाना पहचाना है।रोज़ वही आशिक, रोज़ वही दीवाना है।......मुकेश बेलवाल
एक आम सा रस्ता कुछ जाना पहचाना है।रोज़ वही आशिक, रोज़ वही दीवाना है।
......मुकेश बेलवाल