शब तो बस शब है
क्या स्याह, क्या चांदनी
पलकों में कट रही
वे तुम्हारी यादें सुहानी
हर शब बारिश है
मेरी उल्फत-ए-रवानी
भीगने के बहाने ही
बहता आंखों से पानी
मिलो जो तुम तो
संवर जाये जिंदगानी
ख्वाहिशें अपनी ही
अब बन गयी नादानी
सिलसिले यादों के
अब रह गए कहानी

