प्रेम में पुरुषकभी पुरुष नहीं होतास्त्री के वक्ष सेलगा हुआ शिशु रहतासदा - सर्वदाशिशुत्व को त्याग करवह बन जातास्त्री जाति का भोक्ताफिर उसे नहीं मिलतास्त्री का प्रेमन ही रहता प्राप्तव्यबस उसकेहिस्से में बचता है।मरणधर्मा शरीर!!!