पुरुष का रचा सब कुछ
अब स्त्रियाँ तोड़ रही हैं
ज्ञान, तर्क, धर्म, मिथक
और उनसे परे सब सीमायें
समन्दर और आसमाँ को लाँघ
चाँद, मंगल और अंतरिक्ष के पार
फहरा रही दिग्विजयी पताकायें
आज पुरुष के जीतने योग्य
सब कुछ स्त्रियाँ जीत रहीं हैं
और पुरुष अस्तित्व के लिए
उन्हीं स्त्रियों को जीतने में रत हैंl
#मनोज श्रीवास्तव 'अनाम'

