इश्क़ ए ज़िन्दगी के दरमियां तमाम लिखाहजारों लफ्ज़ तुम्हारे हुस्न के नाम लिखा।तुम्हें ख़ुद से बाहर न कभी देखा है नसीबांबड़े अदब से तेरे लहज़े को अनाम लिखा।
इश्क़ ए ज़िन्दगी के दरमियां तमाम लिखाहजारों लफ्ज़ तुम्हारे हुस्न के नाम लिखा।
तुम्हें ख़ुद से बाहर न कभी देखा है नसीबांबड़े अदब से तेरे लहज़े को अनाम लिखा।