रात तन्हा अनामकिसी साये के साथ।बहुत याद आता है,तेरा वो हाथों में हाथ।इश्क़ अपना कुछ,इस मुकाम पर आया,लबों पर ख़ामोशी,दुआओं में उठते हाथ।
रात तन्हा अनामकिसी साये के साथ।
बहुत याद आता है,तेरा वो हाथों में हाथ।
इश्क़ अपना कुछ,इस मुकाम पर आया,
लबों पर ख़ामोशी,दुआओं में उठते हाथ।