बसंत सा तेरा प्यारअब फागुन सा मादक हुआअंतर्मन में छिपा स्नेहअब कस्तूरी सा गमक रहाजो बीत गया लम्हास्मृतियों को करते सुनहरासपनों में सही अनामयह हृदय बस तुम पर लुटा
बसंत सा तेरा प्यारअब फागुन सा मादक हुआ
अंतर्मन में छिपा स्नेहअब कस्तूरी सा गमक रहा
जो बीत गया लम्हास्मृतियों को करते सुनहरा
सपनों में सही अनामयह हृदय बस तुम पर लुटा