तुम्हारे नज़दीक आने पहाड़ी रास्तों को नापना
आवाज़ से तुम्हारी, तुम्हारी मुश्किलों को भांपना
बर्फ़ में भी तुम्हारे बुने स्वेटर की गिरफ्त में कांपना
ये ज़ेहन में तेरा सुरूर है या बस मेरे इश्क़ का फ़ितूर है।
रातों की गश्त में दुश्मन की जगह बस तुम्हें सोचना
चाय की चुस्कियों में अदरक की जगह तुम्हें खोजना
आंख से कचरा हटाने के बहाने तेरी यादों को पोछना
ये ज़ेहन में तेरा सुरूर है या बस मेरे इश्क़ का फ़ितूर है।
ज़ुबां को याद अब भी वो गाजर का हलवा और बूंदी का रायता
बिन तेरे ख़्वाबों की रातों में, यूं करवटें बदलना हमारा काय का
पिछली छुट्टी से अब तक लबों पर ठहरा तेरे माथे का ज़ायका
ये ज़ेहन में तेरा सुरूर है या मेरे इश्क़ का फ़ितूर है।


