कल रात के

करेलों का ज़ायका

आज भी

ज़ुबां और ज़ेहन में है

पता नहीं कौन सी मिश्री से

उंगलियां बनी हैं उसकी

उसके हाथों से बने

कड़वे करेले भी

मीठे से लगते हैं...


~ इक़बाल सिंह...✍️