तू मेरे दस्तरस में नहीं तो क्या

मैं चाहूंगा यूं ही तुम्हें उम्र भर


इतना भी ख़ास नहीं था वो शख़्स

जिसे मैं चाहता रहा हूं उम्र भर


हम लड़कर बर्बाद ही क्यूं करें ये वक्त

बहुत कम हैं मोहब्बत के लिए उम्र भर


एक अजनबी से रिश्ता जोड़ कर मैंने

उसे वादा कर दिया कि निभाउंगा उम्र भर


वो चली अपने किसी रकीब के पास

अंज़ाम ए मोहब्बत कि उसे भूल न पाए उम्रभर


अबद तक साथ देने का वादा था उसका

उससे निभाया गया वादा एक उम्र भर


उसकी यादों कि असीर बन गुजरी ज़िंदगी मेरी

फिर भी दुआओं में उसे ही मांगता रहा उम्र भर


असीर - कैदी, अबद - अन्नतकाल तक , रकीब -प्रेमिका का दुसरा प्रेमी

दस्तरस - पहुंच