मैं कभी भी उस के बारे में लिखने नहीं बैठता हूं
मैं तो सिर्फ़ उस के बारे में लिखने का सोचता हूं
मेरी कलम उस को ख़ुद ब ख़ुद लिखती हैं
जैसे कि मेरी कलम पहले से ही जानती हैं
कि मुझे उस से कब और क्या ?
कहने को दिल करता हैं
जैसे वो वाकिफ हो मेरे हर जज़्बातों से
उसके बारे में ख़ुद से किए गए बातों से
तन्हाइयों में उसे याद किए गए रातों में
ख़्वाबों में की गई सारी मुलाकातों से
मगर फिर भी यहीं एक मलाल रहेगा उम्र भर
उसके बारे में मुझसे सवाल किया जाएगा उम्र भर
मेरी मोहब्बत अधूरी रह कर भी एक निशानी छोड़ेगी
बिछड़ने के बाद उस से देखना मुहाल हो जाएगा उम्र भर
ये दिल फिर भी उन को कू ए दिल में तलाश करता रहेगा
उन का चलते चलते आख़िर बार तकना याद करता रहेगा
उसको चाहने का सिर्फ़ यहीं एक उपहार मिला हैं
उस की यादों का पूरा का पूरा भंडार मिला हैं
यहीं होता हैं अगर मोहब्बतों कि कहानियों में तो
मुझे सदियों - सदियों तक का प्यार मिला हैं
बाद उस के अब मेरी ज़िंदगी में क्या ही रह जाएगा
वो क़ैस अपना घर छोड़ दिया हैं तो किधर जाएगा
मैं उस वक्त तक लिखने कि करूंगा कोशिश उसको
जब तक कि मेरे तनु को छोड़ कर रूह नहीं जाएगा


