बड़ी ही मोहब्बत से देख रहा था महबूब मेरा

निगाहों से ही कहर ढा रहा था महबूब मेरा


मुझे पाना भी और खोना भी नहीं चाहता

अज़ब सी मोहब्बत कर रहा था महबूब मेरा


मैं गलती से भी किसी गैर को न मिल जाऊं

वास्ता ही नहीं रखने दे रहा था महबूब मेरा


मेरे दिल में मोहब्बत की चिंगारी भड़का कर

हम से ही किनारा कर रहा था महबूब मेरा


हमको उससे कितनी मोहब्बत पूछ रहा हैं वो

मोहब्बत की सबूत मांग रहा था महबूब मेरा


इश्क़ में एक और बंदा हार गया हैं 'अंकित'

यहीं बड़ी देर से समझा रहा था महबूब मेरा