यहीं तो दिक्कत हैं कि मैं भुलता कुछ नहीं
जो मोहब्बत के जंजाल में फंस जाते हैं
उन लोगों का फिर बचता कुछ नहीं
उस ने फ़तवा जारी करवा दिया मेरे खिलाफ़
सादगी देखो मैं अपनी बगल़ में कहता कुछ नहीं
जो मुझे जानने का दावा कर रहा हैं
वो शख्स मेरे बारे में जानता कुछ नहीं
वो जो मेरी बातों का बुरा मान कर बैठा है
उस से कह दो कि अब मैं कहता कुछ नहीं
मैं उस पर सब कुछ हार दूं अपना पर
वो शख़्स मुझे अपना मानता कुछ नहीं
कुछ यूं फासले हैं हम दोनों के दरमिया
वो मेरे पास बैठा हैं पर करता कुछ नहीं
तुमने उस की आंखों का आंसू देखा ही नहीं 'अंकित'
तुम को सिर्फ़ अपना दुःख दर्द दिखता हैं और कुछ नहीं

