ऐसा क्या हैं हम दोनों के दरमियां जो सोने नहीं देता,
मैं किसी और का होना भी चाहूं तो होने नहीं देता.
ये सड़कें मेरी जाने की चाह जानती हैं,
कोई हैं सड़क में जो तुझ तक पहुंचने नहीं देता.
कोहरा भी इस कद्दर पड़ा हैं इस शहर में,
जो मुझे पास की चीज़ें भी देखनें नहीं देता.
एक तलब हैं मेरे अंदर तुझे देखने की ,
ये कौन शख़्स हैं जो मुझको देखने नहीं देता..

