किस तरह से रोके इस दिल को हम

रोक सकते तो कब का रोक देते हम




अब ये न कहना कि वो तुम्हारे नहीं हैं

ये भी बहुत पहले से ही जानते हैं हम




तुम से मिल कर खुश तो होता हूं मगर

बिछड़ कर काफ़ी उदास हो जाते हैं हम




मोहब्बत के खेल में हार के लौटे हुए हैं 

अभी कहां ही किसी पे भरोसा करते हम




यूं ही कैसे बदल गए जज़्बात तुम्हारे

तुमने तो कहा था कि साथ रहेंगे हम




बिछड़ने वालों से शिकवा अच्छा नहीं दोस्त

चलो छोड़ो ' अंकित ' अब आगे का सोचे हम