वो खून नही वो पानी है,

जिसमे छिपी मनमानी है।

सम्मान की आड़ में जो तू कर रहा,

बेटा वो तेरी नादानी है।

 

चल माना तू खानदानी है,

चांदी में पीता पानी है,

पर जिस रवि को तू छूना चाहता है,

बेटा वो आग है ना कि पानी है।

 

जिस शशि की तू इच्छा रखता,

जिसे देख तू आहे भरता,

जिसे देख तू हर्षित होता,

तन को तरता मन को भरता,

वो शशि भी तो अविरल है,

बिम्ब है वो निर्मल जल है।

 

जो सोच तू रखता है ,

वो गंदे नाले की पानी है ,

अब तू ही बता कैसे मानु,

तू सूत एक खानदानी है,

सबके संग संघ तू बहना सिख,

जैसे बहता पानी पर पानी है

          lovit ans...