मैं कुछ नहीं लिखता यार।
सब ऊपरवाले की मेहरबानी है।
मैं तो हूँ चंद लम्हों का मेहमान।
खुदाई उसकी जारी है।
ये शब्द जो मैं लिख रहा हूँ।
पूरी तरह से मेरी जिम्मेदारी है।
मैं लिखता हूँ कभी झूठ।
मगर उसकी जुबान काफ़ी पुरानी है।
सच कहता है वो।
यही तो जवानी है।
अभी से मौत के इंतजार में हो।
पूछता है?? ये कैसी नादानी है।
मैं कुछ नहीं लिखता यार।
सब ऊपरवाले की मेहरबानी है।

