Poetry 1 min read 48K reads

खयाल।


मैंने ज़हर पीया है ज़िंदगी का।खयाल रहे कहीं मैं मर ना जाऊं।

मिली है मौत मुझे हर रोज़।खयाल रखा है उसने मेरा कहीं मैं डर ना जाऊं।

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