उसे मोहब्बत थी मेरी दौलत से।
उसने मुझे कभी समझा ही नहीं।
दौलत तो थी मेरे किरदार में।
उसने कभी पहचाना ही नहीं।
वो चाहती तो सब बदल सकता था।
मैं भी संभल सकता था।
उसने वादे ना तोड़े होते तो।
आज भी सब कुछ जुड़ा होता।
मेरा घर भी बड़ा होता।
मैं मेरे काफिले का सरदार भी होता।
नहीं आता समाने कोई भी।
और आता तो मिट्टी में मिला दिया जाता।

