वो समय की उल्फ़त में गुज़रता गया,और हम बहते हुए किनारे ढूँढ़ते गए।ना जानते हुए भी उन्हें हम अच्छे से समझते गए।पर ये मेरी नासमझी थी,जो हम समझ के भी नासमझ बनते गए।
वो समय की उल्फ़त में गुज़रता गया,और हम बहते हुए किनारे ढूँढ़ते गए।
ना जानते हुए भी उन्हें हम अच्छे से समझते गए।पर ये मेरी नासमझी थी,जो हम समझ के भी नासमझ बनते गए।