
हाथो में जब कलम होती है
घड़ियों की न कोई इल्म होती है
लिखता जा लिखता जा ए हमराही
लिखना भी तो उस खुदा की इबादद होती है
जब एक लेखक रातभर लिखता है
तभी ये देश हर सुबह जगता है
जब उठी थी ये कलम अंग्रेजी राज में
तभी सुलगा था वो जिस्म आग में
कितनी कलमे टूटी कितनी तोड़ी गयी
जिंदगी छोड़ दी पर कलम न छोड़ी गई
क्या होगा देश का उस दिन
जिस दिन ये कलम दम तोड़ देगी
जब एक कविता, जब एक कवि का
दामन छोड़ देगी
तब वो भखत फिर आएगा
गुलामी का परचम फिर लहराएगा
दुर्भाग्य है ए साहब ये मेरे देश का
क्योंकि ये बहरो का
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