ए नींबू के पेड़

तुझमें कांटे ही कांटे

फिर भी तुझे में पालू

बहुत प्यार से,

तेरे छोटे कांटेदार डाल में

आते हैं जोड़े मैना के

इश्क़ की नुमाइश करते

क़भी लड़ झगड़ते हैं सारे,

उसकी चिल्लाहत से

पक जाते हैं कान मेरे

आ जाते हैं हाल चाल पूछने

मेरे परोसी सारे।

हवा भी तेरे पत्तों को

छेड़ते बहुत प्रेम से

उसे भी पता है पंगा

नहीं लेना तुझसे

वरना छिड़के रख दोगे

इतना ताकत है तुझमें,

तेरी चाह में आते है सूरज भी

विश्राम करने

तेरे झाड़ियों की छाये में.....