मिस्टर अम्बेडकर!

तुम्हारी किताब में

ये काफ़ी

खतरनाक विचार हैं

कि

पूरी आदम जात का एक आधार है।


कि

कोई किसी भी

जुल्म न करे,


जो जिससे मर्जी

प्रेम करे-


कि

हक मिले हर

हकदार को-

खेत मिले

हर हलदार को।


जड़ और जंगल मिले

वहाँ के वासी को-

रोटी मिले

हर निवासी को।


ऐसा कैसे होगा?

जो कहीं नहीं हुआ-

वो कैसे होगा?


मानव सभ्यता तो

मालिकों की सभ्यता रही ही है

अम्बेडकर

मजदूरों की कहानियां

अब तलक तो मौन है


काफ़ी खतरनाक है मंसूबे

तुम्हारे

मिस्टर अम्बेडकर-


बताओ

तुम्हारे गुलाबी खयालों में

पलता

ये जादुई मुल्क कौन है?


(किताब गंज)


#AmbedkarJayanti