एक किसान का जीवन भी देखो

कभी उसके जीवन मे भी झाँको

बड़ा थका हारा जीवन लगेगा उसका

कभी एक दिन इसे जीकर तो देखो

मेहनत कड़ी मेहनत ही है इसमे

आराम नहीं है नसीब के इसमे

नसीब ऐसा तुम सोचकर तो देखो

जब पसीने से तरबतर वो थककर बैठे

तुम कभी इतने पसीने मे भीगकर तो देखो

सदियों से लोग इसी का खाते आए

मगर पूजा फिर भी भगवान की करते आए

मंदिरों मे अर्पण करो तुम लाख चीज़ें

कभी इसके घर भी तो जाकर देखो

किसान कभी कुछ मांगता नहीं है

जीवन भर वो सिर्फ देता है बस

तुम कभी ज़रा ये सोचकर तो देखो....