चेहरा 

उसपे धूप 

गरम -सी सर्दी की

साँसे अंदर फिर बाहर 

ऐसे ही 

फिर अंदर और फिर बाहर 

मगर धूप वही

एक सी लगातार 

कुछ कहना है धूप?

नहीं बस कुछ नहीं 

कहे जैसे ये हर बार 

तुम्हारी खामोशी ये चुप्पी 

कैसे रहती हो तुम ऐसी?

पूंछू भी तो आखिर किससे ये ?

कौन है ...?

किससे करूँ ये सवाल?

खैर छोड़ो ....

फिर अब वही ....

चेहरा 

उसपे धूप 

गरम- सी सर्दी की