ये रोतो को और रुलाये
बच्चो को मजहब समझाये
बचपन से ही जात सिखाकर
कच्ची मिट्टी से हथियार बनाये
उनकी नज़रो का वहम बताकर
अंधो के घर में आग लगाये
ये कपड़ो का से धर्मं जताकर
रंगों का मजहब गिनवाए
खाक विलादत खाक जवानी
खाक में हर मजहब मिल जाये
ये मजहब को समझाने वाले
मुर्दे का मजहब समझाये
गर मुस्लिम का पंछी मंदिर बैठे
तो क्या पंछी को मार गिराए
ये रोटी है मुस्लिम घर की
अब हिन्दू गाय को कोन बताये
खुदा का हिन्दू , राम का मुस्लिम
राम की बकरी , खुदा की गाय
हवा भी उसकी , जमी भी उसकी
कोई कुदरत का मजहब समझाये
कोई ओढे सब सरमाया
कोई सुखी रोटी खाये
तेरा मजहब ऐश रईसी
क्या गुर्बत भी मजहब देखके आए
वो जो मजहब मजहब बाटे
ब्स वो ही घूमे सब मर जाये
मिम्बर पे बैठे पाठ पढ़ाये
ये जो सबकी जात बताये
हर जिस्म की जात बताने वाले
मुझको जात की जात बताये
सबकी प्यास मिटाय सियासी
मुझको पानी का मजहब समझाये
सब मजहब पे लड़ते फिरते
अब भूख फ़कीर की कौन मिटाये
रखू रोजा या उपवास करू मै
कोई मौलवी पंडित बतलाये
मन्नत मेरी किस्से मांगू
कोई खुदा नया भगवान बताये
यही इलतजाह मजहबीयो से
मुझको इंसानों का पता बताये


